16.8.26

प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज श्रावण शुक्ल पक्ष चतुर्थी विक्रमी संवत् २०८३ तदनुसार 16 अगस्त 2026 का सदाचार संप्रेषण *१८४३ वां* सार -संक्षेप मुख्य विचारणीय विषय क्रम सं ३२५

 प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज श्रावण शुक्ल पक्ष चतुर्थी विक्रमी संवत् २०८३  तदनुसार 16 अगस्त 2026 का सदाचार संप्रेषण

  *१८४३ वां* सार -संक्षेप 

स्थान : नई दिल्ली 


मुख्य विचारणीय विषय क्रम सं ३२५

हमें अपने भीतर निहित ऊर्जा, ऊष्मा, पौरुष, विक्रम, शौर्य, पराक्रम और तिग्मता आदि  जीवनदायी तत्त्वों के स्वरूप और सामर्थ्य को समझते हुए अपनी जीवनचर्या को इस प्रकार व्यवस्थित करना चाहिए कि हमारी जीवनशक्ति अनुशासन, साधना, पुरुषार्थ और सृजन के रूप में सार्थक दिशा प्राप्त करे।



हमें जीवन में विभिन्न भूमिकाएँ प्राप्त होती हैं। यही इस नाम-रूपात्मक जगत की विविधता और आनन्द है यही परमात्मा की लीला है lअतः हमें जो भी भूमिका प्राप्त हो, उसमें पूर्ण मनोयोग, निष्ठा और समर्पण के साथ रम जाना चाहिए। भगवान श्रीराम इसका सर्वोत्तम उदाहरण हैं वे अपनी प्रत्येक भूमिका में पूर्णतः रमे और इसी कारण जन-जन के हृदय में भी रम गए।

 राम-राज्य, जिसमें जनता शासक के साथ समरूप हो गयी की, चर्चा हम आज भी करते हैं, जबकि उनके पूर्वजों के राज्य भी उसी परम्परा में धर्म, न्याय, लोककल्याण और सुशासन के आदर्श रहे थे ।तथापि रामराज्य का स्मरण विशेष रूप से इसलिए होता है कि भगवान् राम ने राजसत्ता को केवल शासन का माध्यम नहीं, बल्कि धर्म, मर्यादा और लोकमंगल की साधना बना दिया था।

भगवान राम धर्म का उपदेश देने वाले नहीं अपितु धर्म को अपने जीवन में साकार करने वाले हैं l वे अपने सामर्थ्य का श्रेय स्वयं को नहीं देते। वे जानते हैं कि मनुष्य कितना ही सामर्थ्यवान क्यों न हो, उसके जीवन में गुरु, संस्कार, शिक्षा और कृपा का महत्त्व अत्यन्त बड़ा है। तभी भगवान राम कहते हैं 


गुर बसिष्ट कुलपूज्य हमारे। इन्ह की कृपाँ दनुज रन मारे॥3॥


गुरु वसिष्ठ/वशिष्ठ हमारे कुल के पूजनीय गुरु हैं। इन्हीं की कृपा से मैंने रणभूमि में दानवों का संहार किया l यही रामत्व है यही मनुष्यत्व है l मनुष्यत्व की अनुभूति करते हुए ही हमें शक्ति बुद्धि संयम स्वाध्याय और राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत जनों का कुटुम्ब अर्थात् संगठन निर्मित करना है l

दीनदयाल शोध संस्थान की चर्चा क्यों हुई,आचार्य जी ने अपने महाविद्यालय का कौन सा प्रसंग बताया, अधिवेशन का हेतु क्या है, छोटी सी पिपहरी क्या है जानने के लिए सुनें l