2.8.26

प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज श्रावण कृष्ण पक्ष चतुर्थी विक्रमी संवत् २०८३ तदनुसार 2 अगस्त 2026 का सदाचार संप्रेषण *१८२९ वां* सार -संक्षेप मुख्य विचारणीय विषय क्रम सं ३११

 कर्मानुराग, विचार, चिंतन मानवोचित  संपदा है, 

सिर्फ भौतिक भावरतता ही जगत की आपदा है। 

जाग जाओ उठपड़ो विश्वास की पूँजी सहेजो, 

सुनो सबकी गुनो भी पर करो वह निज मन कहे जो ॥


प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज श्रावण कृष्ण पक्ष चतुर्थी विक्रमी संवत् २०८३  तदनुसार 2 अगस्त 2026 का सदाचार संप्रेषण

  *१८२९ वां* सार -संक्षेप

मुख्य विचारणीय विषय क्रम सं ३११

हम अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए परिवार,कार्यक्षेत्र, समाज और राष्ट्र में सक्रिय रहें , किन्तु हमारा मन विषयासक्ति और मोह में न फँसे। इसकी प्राप्ति के लिए ही हमें पूजा,भजन,अध्ययन, स्वाध्याय, ध्यान, लेखन तथा सत्संग जैसे साधनों में प्रवृत्त होना चाहिए l ये साधन मन को निर्मल, स्थिर और ईश्वराभिमुख बनाते हैं, जिससे हम संसार में रहते हुए भी उससे अलिप्त रहने की कला सीखते रहते हैं।


श्रीरामचरितमानस जो तुलसीदास जी की ज्ञानमयी भक्ति का द्योतक है ऐसा दिव्य ग्रन्थ है, जिसके श्रद्धापूर्वक अध्ययन, श्रवण और मनन से मनुष्य के अन्तःकरण की मलिनता दूर होकर उसमें ज्ञान, भक्ति, प्रेम, धर्म, नीति, शौर्य, पराक्रम और लोककल्याण का उदय होता है।

आजकल हम लोग श्रीरामचरितमानस के लंका कांड का आनन्द ले रहे हैं l


लक्ष्मण जी को उठाकर हनुमान जी भगवान राम के पास ले आए।  भगवान ने लक्ष्मण जी से कहा - हे भाई! हृदय में समझो, तुम काल के भी भक्षक और देवताओं के रक्षक हो।


सुनत बचन उठि बैठ कृपाला। गई गगन सो सकति कराला॥

पुनि कोदंड बान गहि धाए। रिपु सन्मुख अति आतुर आए॥


यह वचन सुनते ही रामप्रिय कृपालु लक्ष्मण जी उठकर बैठ गए। वह भयंकर शक्ति आकाश में चली गई। तत्पश्चात् लक्ष्मण जी ने अपना धनुष-बाण हाथ में लिया और बड़े उत्साह तथा शीघ्रता के साथ शत्रु के सम्मुख युद्ध के लिए पहुँच गए।


तत्पश्चात् उन्होंने बड़ी ही शीघ्रता से रावण के रथ को चूर-चूर कर और सारथी को मारकर रावण को भ्रमित, भयभीत और व्याकुल कर दिया। सौ बाणों से उसका हृदय बेध दिया, जिससे रावण पृथ्वी पर गिर पड़ा। तब दूसरा सारथी उसे रथ में डालकर तुरंत ही लंका को ले गया।

इसके आगे आचार्य जी ने क्या बताया,गांव भाग्य की विडम्बना क्यों झेल रहे हैं, औरास के विद्यालय की चर्चा आचार्य जी ने क्यों की जानने के लिए सुनें l