कभी कभी दुनियादारी में संयम भी डिग जाता है,
उसको भी हल्केपन का कुछ चस्का सा लग जाता है,
पर धीरज का संस्कार जिनको बचपन से होता है,
उनका संस्कार फिर से ठोकर खाकर जग जाता है।
प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज श्रावण कृष्ण पक्ष सप्तमी विक्रमी संवत् २०८३ तदनुसार 5 अगस्त 2026 का सदाचार संप्रेषण
*१८३२ वां* सार -संक्षेप
मुख्य विचारणीय विषय क्रम सं ३१४
अपना चिन्तन सदैव सकारात्मक रखें l संसार को संसार की दृष्टि से देखें स्वयं को स्वयं की दृष्टि से l शौर्यप्रमंडित अध्यात्म की अनुभूति करते रहें l
भारतवर्ष का संसार अत्यन्त अद्भुत और दिव्य है, जहाँ मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान् श्रीराम, लीलापुरुषोत्तम भगवान् श्रीकृष्ण, देवाधिदेव भगवान् शिव, अनगिनत संतों,ऋषियों , मुनियों , तपस्वियों , योगियों तथा असंख्य देशभक्त महापुरुषों ने जन्म लेकर अपने आदर्श जीवन से सम्पूर्ण मानवता का मार्ग आलोकित किया। यही वह पुण्यभूमि है जहाँ धर्म, ज्ञान, तप, त्याग, करुणा और लोकमंगल की महान परम्परा आज भी प्रवाहित हो रही है। हम सौभाग्यशाली हैं कि हमारा जन्म भारत में हुआ है और हमें दीनदयाल विद्यालय के माध्यम से संस्कारित किया गया l हम यदि सदैव यह ध्यान में रखेंगे तो विपरीत विषम परिस्थितियां हमें विचलित नहीं होने देंगीl
आजकल हम लोग रामकथा के माध्यम से सद्गुण ग्रहण कर रहे हैं l
रामकथा अत्यन्त कल्याणकारी है यह हमारी व्यथा दूर करती है l
इस समय हम उस प्रसंग में प्रविष्ट हैं जहां भगवान् श्रीराम जी द्वारा रावण का शरीर धराशायी किया जा चुका है l भगवान राम चाह रहे हैं कि माता सीता को पैदल लाया जाए ताकि प्रजा उनके दर्शन कर ले l दर्शन हो जाते हैं l लोकमर्यादा की स्थापना के लिए सीता जी अग्नि में प्रवेश करती हैं; अग्निदेव उन्हें निष्कलंक सिद्ध कर श्रीराम को सौंपते हैं। श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण जी , विभीषण तथा वानरवीरों सहित पुष्पक विमान से अयोध्या के लिए प्रस्थान करते हैं।
इसके आगे आचार्य जी ने क्या बताया,अनल में अपने को सुरक्षित रखने का योगमार्ग से क्या सम्बन्ध है,आज आचार्य जी उन्नाव और कानपुर की यात्रा पर क्यों हैं, भैया वीरेन्द्र त्रिपाठी जी, भैया आशीष जोग जी का उल्लेख क्यों हुआ,जानने के लिए सुनें l</ p>