8.8.26

प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज श्रावण कृष्ण पक्ष दशमी /एकादशी विक्रमी संवत् २०८३ तदनुसार 8 अगस्त 2026 का सदाचार संप्रेषण *१८३५ वां* सार -संक्षेप मुख्य विचारणीय विषय क्रम सं ३१७

 प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज श्रावण कृष्ण पक्ष दशमी /एकादशी विक्रमी संवत् २०८३  तदनुसार 8 अगस्त 2026 का सदाचार संप्रेषण

  *१८३५ वां* सार -संक्षेप 


मुख्य विचारणीय विषय क्रम सं ३१७

ध्यान रखना चाहिए कि जब परिवार में दुःख की घड़ी आती है, तब उल्लास के कार्यक्रम स्वतः स्थगित कर दिए जाते हैं। वहाँ औपचारिकता नहीं, संवेदना प्रधान होती है, किसी एक सदस्य का दुःख पूरे परिवार का दुःख बन जाता है।

इसी प्रकार यदि हमें वास्तविक, सशक्त और चिरस्थायी संगठन खड़ा करना है, तो हमें परिवार-भाव विकसित करना होगा जहाँ किसी की प्रसन्नता में सब प्रसन्न हों और किसी के दुःख में सब उसके साथ खड़े हों।


भारतवर्ष की भूमि पर बहुत पहले से ही सत् और असत्, शिष्ट और दुष्ट, धर्म और अधर्म के बीच संघर्ष चलता आया है। दुष्ट लोग शिष्ट पुरुषों को कष्ट देने के लिए सदैव तत्पर रहे हैं। यह भारत की भूमि की एक चिरन्तन विशेषता है और यही भारत की भूमिका भी है कि संघर्ष के बीच धर्म और सत्य की स्थापना होती रहे।

सत् और रज का यह संघर्ष चलता रहेगा। इसलिए हमें परिस्थितियों से व्याकुल नहीं होना है। बाहरी संसार में कितना ही द्वन्द्व क्यों न हो, हमारे भीतर शान्ति, धैर्य और धर्म की ज्योति बुझनी नहीं चाहिए।

इसके लिए आवश्यक है कि हमारे भीतर रामात्मकता की अनुभूति जागे। रामात्मकता का अर्थ केवल भगवान राम का नाम लेना नहीं, बल्कि अपने विचारों, वाणी, आचरण और कर्तव्य में भगवान राम के गुणों को उतारना है। 

*निसिचर हीन करउँ महि भुज उठाइ पन कीन्ह।*


जब भीतर राम का भाव जागता है, तब रावण जैसी प्रवृत्तियाँ हमें विचलित तो कर सकती हैं, पर पराजित नहीं कर सकतीं।

आज कल हम लोग भगवान राम की कथा सुन रहे हैं 


समर बिजय रघुबीर के चरित जे सुनहिं सुजान।

बिजय बिबेक बिभूति नित तिन्हहि देहिं भगवान॥

रामकथा सुनना मात्र एक कथा सुनना नहीं है; यह अपने भीतर जमी हुई उन वृत्तियों पर निरन्तर प्रहार करना है जो मनुष्य को उसके वास्तविक स्वरूप से दूर ले जाती हैं।


राम नाम गुन चरित सुहाए। जनम करम अगनित श्रुति गाए॥

जथा अनंत राम भगवाना। तथा कथा कीरति गुन नाना॥


कथा में आचार्य जी ने आज क्या बताया, श्री अभय महाजन जी और श्री सुरेश सोनी जी की चर्चा क्यों हुई, स्व भैया निखिल कुमार जी बैच २००१  निवासी चमियानी उन्नाव जो DRDO देहरादून में वैज्ञानिक थे के संदर्भ में आचार्य जी ने क्या बताया जानने के लिए सुनें l