22.7.26

प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज आषाढ़ शुक्ल पक्ष नवमी (भड़ली नवमी) विक्रमी संवत् २०८३ तदनुसार 22 जुलाई 2026 का सदाचार संप्रेषण *१८१८ वां* सार -संक्षेप मुख्य विचारणीय विषय क्रम सं ३००

 अस्मिञ्जीवति वीरे तु हतमप्यहतं बलम्।हनूमत्युज्झितप्राणे जीवन्तोऽपि मृता वयम्॥


प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज आषाढ़ शुक्ल पक्ष नवमी (भड़ली नवमी)

विक्रमी संवत् २०८३  तदनुसार 22 जुलाई 2026 का सदाचार संप्रेषण

  *१८१८ वां* सार -संक्षेप

मुख्य विचारणीय विषय क्रम सं ३००

आर्ष साहित्य केवल कथाओं का संग्रह नहीं, बल्कि जीवन का शाश्वत मार्गदर्शन है। इसे केवल पढ़ें नहीं, आत्मसात् करें और उसके सनातन संदेश को आज की पीढ़ी तक उनकी भाषा और शैली में पहुँचाएँ।


हमारा आर्ष साहित्य मात्र कथाओं का संग्रह नहीं है, बल्कि जीवन के शाश्वत सत्य, आदर्श, तप ,त्याग, समर्पण, शौर्य, पराक्रम,कर्तव्य, करुणा और राष्ट्रधर्म का अमूल्य भण्डार है।  हम इन कथाओं को केवल पढ़कर न छोड़ दें l आवश्यक यह है कि हम उन कथाओं में प्रविष्ट हों, उनके पात्रों के मनोभावों को समझें, उनकी परिस्थितियों का अनुभव करें और उनके निर्णयों के पीछे निहित तत्त्वज्ञान को आत्मसात् करें।

आज की नई पीढ़ी की भाषा, सोच और जीवन-शैली भिन्न है। इसलिए केवल छंदों या पारम्परिक शैली में उपदेश देने के स्थान पर हम उन्हीं सनातन सत्यों को आधुनिक उदाहरणों, संवादों, चित्रों, लघु चलचित्रों, कथाओं और सरल भाषा के माध्यम से प्रस्तुत करें l

आजकल हम लोग लंका कांड /युद्ध कांड में प्रविष्ट हैं 

कुम्भकर्ण युद्धभूमि में उतरकर अपने अद्भुत बल और पराक्रम से वानर-सेना में भारी हाहाकार मचा देता है। वह असंख्य वानरों का संहार करता है, जिससे सेना भयभीत होकर इधर-उधर भागने लगती है।

तब श्रीराम स्वयं युद्ध के लिए आगे बढ़ते हैं। दोनों महावीरों के बीच घोर युद्ध होता है। श्रीराम अपने तीक्ष्ण बाणों से पहले कुम्भकर्ण के हाथ काट देते हैं, फिर उसके चरण भी विच्छिन्न कर देते हैं। अंततः दिव्य बाण से उसका विशाल मस्तक काटकर उसका वध कर देते हैं। इसके पश्चात् रावण मेघनाद को पुनः युद्धक्षेत्र में उतरने के लिए कहता है मेघनाद वहां जाने से पहले यज्ञ के लिए सज्ज होता है विभीषण एक रहस्य श्रीराम को बताते हैं कि निकुम्भिला में यज्ञ पूर्ण कर लेने पर मेघनाद को लगभग अजेय होने का वर प्राप्त हो जाएगा l

श्रीराम की आज्ञा से लक्ष्मण, विभीषण के साथ निकुम्भिला पहुँचे और यज्ञ पूर्ण होने से पहले ही उसे युद्ध के लिए विवश किया। घोर युद्ध होता है l

मेघनाद सबको पराभूत कर देता है विभीषण यह सब देख रहे हैं वे जाम्बवान् के पास पहुँचे, तो उन्होंने सबसे पहले हनुमान जी का समाचार पूछा। विभीषण के आश्चर्य व्यक्त करने पर जाम्बवान् बोले— "यदि हनुमान जीवित हैं, तो हम सब जीवित हैं 'l

युद्ध के बाद लक्ष्मण ने  मेघनाद का वध  कर दिया।



इसके अतिरिक्त सरौंहां के भैया रौनक जी की मां जी की चर्चा क्यों हुई, भैया अशोक त्रिपाठी जी का उल्लेख क्यों हुआ,विशल्यकरणी,सन्धानी तथा सुवर्णकरणी क्या हैं जानने के लिए सुनें