14.9.26

प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज भाद्रपद शुक्ल पक्ष तृतीया / चतुर्थी विक्रमी संवत् २०८३ तदनुसार 14 सितंबर 2026 का सदाचार संप्रेषण *१८७२ वां* सार -संक्षेप मुख्य विचारणीय विषय क्रम सं ३५४

 हरतालिका तीज एवं श्रीगणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएँ।


प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज भाद्रपद शुक्ल पक्ष  तृतीया / चतुर्थी  विक्रमी संवत् २०८३  तदनुसार 14 सितंबर 2026 का सदाचार संप्रेषण

  *१८७२ वां* सार -संक्षेप 


मुख्य विचारणीय विषय क्रम सं ३५४

परमात्मा से प्रार्थना करें कि वह हमें भीतर देखने की शक्ति प्रदान कर दे l इससे समस्याओं से ग्रस्त जीवन भी मंगलानुभूति करता रहता है l


सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः l सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत् ll

भारतीय संस्कृति की उस उदात्त जीवन-दृष्टि का परिचायक है, जिसमें व्यक्ति का कल्याण समाज से और समाज का कल्याण समस्त सृष्टि के कल्याण से जुड़ा हुआ है। भारत अद्भुत देश है   जो त्याग तपस्या शुचिता शौर्य पराक्रम  विक्रम का प्रतीक है जहां ऋषिकुल का अद्भुत संविधान है  जहां शरीर को नहीं आत्म को शक्ति माना जाता है जहाँ प्रार्थना केवल अपने लिए नहीं, सबके लिए होती है;

जहाँ जीवन का लक्ष्य केवल भोग नहीं, लोकमंगल है 

यही हमारी संस्कृति है।

यही हमारा सनातन धर्म है।

यही हमारे भारत की आत्मा है।

भारत के देशभक्त के अन्तःकरण में ऐसा अदम्य राष्ट्रभाव और प्रचण्ड संकल्प जाग उठता है, जो वैभव-पराभव, सुख-दुःख, अनुकूलता-प्रतिकूलता—किसी की भी चिन्ता नहीं करता। इसी अटूट राष्ट्रनिष्ठा और अदम्य पुरुषार्थ के बल पर भारत पर आई संकट की कालरात्रियाँ भी अन्ततः पार हो जाती हैं। वास्तविक इतिहास यही है l शिक्षा में इसी का समावेश होना चाहिए l

शिक्षा वह है, जो हमें जीवन के लिए उपयोगी ज्ञान, कौशल, संस्कार और विवेक प्रदान करे तथा जीवन को सार्थक और सक्षम बनाने में सहायक हो।

आचार्य जी परामर्श दे रहे हैं जब से हमारा अपना विद्यालय प्रारम्भ हुआ, तब से उससे जुड़े प्रेरणादायी प्रसंगों, अनुभवों और स्मृतियों का लेखन एवं संकलन होता रहे जिससे विद्यालय की यात्रा, उसके संस्कार और उसके पीछे निहित राष्ट्रभाव आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने l

मानस की कथा में आज आचार्य जी ने क्या बताया,भैया मुकेश जी  फिल्म हनुमान अंश क्यों नहीं देख पाए,

भैया अरविन्द जी से आचार्य जी को कौन सी पुस्तक प्राप्त हुई जानने के लिए सुनें l