3.10.26

प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज आश्विन कृष्ण पक्ष सप्तमी / अष्टमी विक्रमी संवत् २०८३ तदनुसार 3 अक्टूबर 2026 का सदाचार संप्रेषण *१८९१ वां* सार -संक्षेप

 भगति हीन गुन सब सुख ऐसे। लवन बिना बहु बिंजन जैसे॥

भजन हीन सुख कवने काजा। अस बिचारि बोलेउँ खगराजा॥3॥


प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज आश्विन कृष्ण पक्ष सप्तमी / अष्टमी विक्रमी संवत् २०८३  तदनुसार 3 अक्टूबर 2026 का सदाचार संप्रेषण

  *१८९१ वां* सार -संक्षेप


सांसारिक प्रपंचों में उलझे रहने पर भी जब कभी हमें स्वयं को संस्कारित करने का अवसर मिले, हमें उस अवसर को कदापि नहीं छोड़ना चाहिए।  यज्ञमयी भारतीय जीवन-दर्शन में आत्मपरिष्कार और संस्कारपूर्ण जीवन को विशेष महत्त्व दिया गया है। ये असामान्य सदाचार वेलाएं इसी भारतीय जीवन-दृष्टि के अनुरूप हमें भीतर से परिष्कृत करने, हमारे आचरण को श्रेष्ठ बनाने और जीवन को सार्थक दिशा देने का एक अमूल्य अवसर हैं। तो आइये इस अवसर का लाभ उठाएं l


हनुमान चालीसा भक्ति, शक्ति, सेवा, समर्पण और विवेक का अत्यन्त भावपूर्ण काव्य है। गोस्वामी तुलसीदास जी ने इसमें भगवान श्रीहनुमान के स्वरूप, गुण, सामर्थ्य और प्रभु श्रीराम के प्रति उनकी अनन्य भक्ति का अत्यन्त सुंदर चित्रण किया है। इसकी प्रत्येक चौपाई साधक को अपने जीवन में शौर्य, पराक्रम , संयम, निष्ठा और कर्तव्यपरायणता अपनाने की प्रेरणा देती है।हनुमान चालीसा में अत्यन्त गहन और भावपूर्ण अभिव्यक्ति है। गोस्वामी तुलसीदास जी ने इसे अवधी भाषा में रचकर गूढ़ आध्यात्मिक भावों को अत्यन्त सरल और सहज बना दिया है। फ्लाईदुबई का विमान उड़ाते समय कैप्टन स्मित मच्छार हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे थे।


जै जै जै हनुमान गोसाईं ।

कृपा करहु गुरुदेव की नाईं ॥


जो सत बार पाठ कर कोई ।

छूटहि बंदि महा सुख होई ॥

इसके अतिरिक्त आचार्य जी ने स्वास्थ्य शिविर का उल्लेख क्यों किया,बाबा गोरखनाथ का नाम क्यों आया, रामकथा में आज आचार्य जी ने क्या बताया जानने के लिए सुनें l