5.11.21

 प्रस्तुत है युगभारतीवंशकेतु आचार्य श्री ओम शंकर जी का आज दिनांक 05/11/2021 का सदाचार संप्रेषण

संसार वक्र गति से चलता है भावमय संसार है विचार उसका प्रसार है कर्म उस संसार को व्यस्त रखने का प्रभु द्वारा बनाया गया अद्भुत आधार है बिना कर्म के हम जीवित नहीं रह सकते सांस लेना भी एक कर्म है

शरीर में प्राण हैं तो शरीर चलता है  लेकिन जब शरीर से प्राण मुक्त हो जाते हैं तो प्राण चलते हैं और प्राण से उसका सूक्ष्म आधार मुक्त होने लगता है तो भाव चलते हैं और भाव भी शान्त हो जाते हैं तो परमात्मा सारी चञ्चलता को अपने भीतर समेट कर निर्विकल्प समाधि में रहता है यह भारतीय जीवन पद्धति की परिकल्पना है जिस पर बहुत लोग विश्वास करते हैं

कल भैया मोहन कृष्ण जी की माता जी नहीं रहीं और मुकेश जी के साथ भी इसी तरह की दुर्घटना हुई उनके भी कुछ आत्मीय जन अकाल मृत्यु का शिकार हो गये 

भारतवर्ष का कथात्मक साहित्य  बहुत महत्त्वपूर्ण है

धन्ना भगत ज्ञानी और परम भक्त थे किसी की शव यात्रा में वे चलते थे तो ढपली बजाते थे गाते थे वे कहते थे यह भी तो बारात है दूल्हा प्रभु से मिलने जा रहा है लेकिन जब युवा पुत्र नहीं रहा तो ढपली बजाई किन्तु ताल नहीं बन पा रही थी किसी ने कहा आज तो आप सही नहीं बजा पा रहे तो फफक कर रो पड़े

पुरजन परिजन सकल निहोरी। तात सुनाएहु बिनती मोरी॥

सोइ सब भाँति मोर हितकारी। जातें रह नरनाहु सुखारी॥1॥

आदि की व्याख्या करते हुए आचार्य जी ने मोह का वर्णन किया l मोह से मुक्ति हो इसका प्रयास किया जाता है

आपने 

धीरज धर्म मित्र अरु नारी। आपद काल परिखिअहिं चारी॥

बृद्ध रोगबस जड़ धनहीना। अंध बधिर क्रोधी अति दीना॥

की भी व्याख्या की


आचार्य जी जब भी अपने पिता जी को याद करते हैं तो भावों से भर जाते हैं

मोह की जड़ें कितनी गहरी होती हैं और उसकी शाखाएं भी बहुत फैली होती हैं

यह धैर्य की परीक्षा है मानस पाठ गीता पाठ ऐसे समय अवश्य करने चाहिए

4.11.21

 प्रस्तुत है वाग्य आचार्य श्री ओम शंकर जी द्वारा प्रोक्त आज दिनांक 04/11/2021 (दीपावली )का सदाचार संप्रेषण

आज दीपावली है आज के दिन हम 

आत्मविश्वास जगाएं आत्मशक्ति जगाएं हमारे अन्दर संयम के साथ ऊर्जा भी हो अन्यथा संयम निराशा का उद्यम बन जाता है 

भारतवर्ष की ऊर्जा को अपने अन्दर प्रवेश कराएं दीपज्योति हमारे भीतर प्रवेश कर जाए अन्धकार को पचाएं प्रकाश को फैलाएं l 

आर्ष  (अर्थात् ऋषियों के द्वारा) व्यवस्था के अन्तर्गत हमारे यहां जितने भी पर्व निर्धारित हैं वे सब सकारण हैं

भगवान् राम आज ही के दिन रामराज्य का भार उठाने के लिए अयोध्या में प्रवेश करते हैं

कल मुकेश जी ने आचार्य जी के साथ मिलकर वञ्चित बच्चों को वस्त्र दिये l यह सुसंगति का प्रभाव है l

हम भारतीयों के बहुत से सद्गुणों को दोषपूर्ण बनाने के लिए बाहर से बहुत लोग आते रहे विलायती लोग व्यापार करने आये और देखा कि भारतवर्ष के लोगों को तो आसानी से घुमाया जा सकता है अर्थात् अपनी आस्था से संस्कृति से विश्वासों से डिगाया जा सकता है 

 आचार्य जी ने JEAN -ANTOINE DUBOIS नामक फ्रेंच मिशनरी की चर्चा की इसकी विस्तृत जानकारी हमारी सांस्कृतिक विचारधारा के मूल स्रोत लेखक सुरेश सोनी लोकहित प्रकाशन लखनऊ  में मिल जायेगी

पश्चिम के लोग धीरे धीरे हमारी संस्कृति का अध्ययन करके इसे विकृत करने लगे मैक्स मूलर ने भी इसे  बहुत विकृत किया 

वेद हम विदेशी नजर से पढ़ने लगे

आचार्य जी ने अपनी लिखी एक कविता सुनाई


हुआ अजब मतफेर लग रहा सगा पराया

और ये कैसा अन्धेर जीत को गया हराया...

इसके अतिरिक्त  विद्यालय में हनुमान जी की प्राण प्रतिष्ठा के समय मुख्य पुरोहित कौन थे? बैरिस्टर साहब का आज आचार्य जी ने नाम क्यों लिया? आदि जानने के लिए सुनें 👇

3.11.21

दिनांक 03/11/2021 का सदाचार संप्रेषण

 प्रस्तुत है यतात्मन् आचार्य श्री ओम शंकर जी का आज दिनांक 03/11/2021 का सदाचार संप्रेषण


आचार्य जी ने बताया पश्चिम यथार्थ तो देखता है लेकिन हम जीवन में उत्साह और जीवन में सातत्य देखते हैं


गगन के उस पार क्या,

पाताल के इस पार क्या है?

क्या क्षितिज के पार? जग

जिस पर थमा आधार क्या है?

दीप तारों के जलाकर

कौन नित करता दिवाली?....

-श्याम नारायण पांडेय


हर जिज्ञासु दीवार के उस पार देखना चाहता है संसार का जिज्ञासु भाव एक धन है l


तुलसीदास जी ने सबसे पहले 

हनुमान चालीसा जानकी मंगल पार्वती मंगल लिखे

और मानस में सबसे पहले अयोध्या कांड लिखा राम के कार्य को मांगलिक रूप से प्रारम्भ किया 

बाल कांड अत्यन्त व्यवस्थित ज्ञान का आधार है और भिन्न प्रकार की समस्याओं का समाधान है

आचार्य जी ने बी एन एस डी इंटर कालेज के पूर्व प्रधानाचार्य श्री सद्गुरु शरण अवस्थी और बारानिकोह से संबन्धित एक रोचक जानकारी दी और बताया कि सद्गुरु जी के अनुसार राम चरित मानस में  उन्नीस हजार शब्दों का प्रयोग हुआ है

क्या तुलसी जी की तुलना मिल्टन शेक्सपीयर आदि से की जा सकती है जिन्होंने छह से आठ हजार शब्दों का ही प्रयोग किया था

हमारे सचमुच के तत्त्व को बहुत नीचे गिराया गया हमारे भाव को कुण्ठित किया गया

हमारे ज्ञान के अथाह भण्डार को कम आंका गया

लेकिन अब इस आत्मबोध को जगाने की आवश्यकता है कि हमारा ज्ञान अत्यन्त अथाह है और इसकी तुलना कहीं से नहीं की जा सकती


वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि।

मंगलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥1॥


भवानीशंकरौ वन्दे श्रद्धाविश्वासरूपिणौ।

याभ्यां विना न पश्यन्ति सिद्धाः स्वान्तःस्थमीश्वरम्॥2॥

 

वन्दे बोधमयं नित्यं गुरुं शंकररूपिणम्।

यमाश्रितो हि वक्रोऽपि चन्द्रः सर्वत्र वन्द्यते॥3॥

आदि की अत्यन्त लम्बी व्याख्या की जा सकती है

इसके अतिरिक्त आचार्य जी जब एक शादी में गये थे तो क्या घटना घटी और आचार्य जी ने जे पी आचार्य जी का उल्लेख क्यों किया आदि जानने के लिए सुनें 👇

2.11.21

दिनांक 02/11/2021 का सदाचार संप्रेषण

 प्रस्तुत है माहात्मिक आचार्य श्री ओम शंकर जी का आज दिनांक 02/11/2021 का सदाचार संप्रेषण


प्रायः सभी के दिन उतार चढ़ाव वाले होते हैं समय की गति टेढ़ी मेढ़ी होती है यह सीधी रेखा में कभी नहीं चलती और इसीलिए यह संसार संसार - सागर कहलाता है संसृति इति संसारः जो प्रतिक्षण बदल रहा है लेकिन चल रहा है संसार स्थूल है तो सूक्ष्म भी है

संसार कभी वापस होकर नहीं आता जन्म मरण भी सिलसिलेवार चलता रहता है

जहां संवेदनशीलता का अभाव है वहीं दुराव है जहां दुराव है वहीं विघटन है कुण्ठएं है कलह है कष्ट है

संसार का आचरण उतार चढ़ाव वाला है चिन्तनशील लोग पीड़ा पी लेते हैं भले ही वो किसी आत्मीय से मिली हो  जिस व्यक्ति में कष्टदायक बात को पचाने की क्षमता जितनी अधिक होगी वो उतना ही सफल है और यह क्षमता ध्यान धारणा स्वाध्याय अध्ययन चिन्तन संगति से विकसित की जा सकती है

लेकिन परमात्मा की लीला है कि जिसके हिस्से में जो आया है वह उसे भोगना ही पड़ेगा

आचार्य जी ने अपनी एक रचना सुनाई


दुनिया औरों को सदाचार सिखलाती है

पर स्वयं असंयम कदाचार की अभ्यासी


आपने एक प्रसंग सुनाया जब वे संघ के प्रचारक के रूप में हमीरपुर के पास सुमेरपुर गये थे

शिक्षक का भाव रहता है कि वह सदाचार के माध्यम से प्रेरणा दे सके

जो आत्मस्थ होने का प्रयास नहीं करता वह खीझते खीझते ही जीवन व्यतीत कर देता है आत्मस्थ होकर अपनी धुन की पूजा करो 

आचार्य जी ने बताया कि लोमश ऋषि जिनकी कल उन्होंने चर्चा की थी अमर माने जाते हैं और  एक लोमश -रामायण भी है l

आचार्य जी ने एक और कविता सुनाई


कविता मन का विश्वास भाव की भाषा है....

आचार्य जी ने इसके अतिरिक्त इक प्यार का नगमा है  (फिल्म :शोर )  जैसे भावपूर्ण गीत लिखने वाले गीतकार संतोष आनन्द की चर्चा की l

आज का TAKE HOME MESSAGE

आत्मस्थ होने का प्रयास करें

1.11.21

दिनांक 01/11/2021 का सदाचार संप्रेषण

 प्रस्तुत है संस्कृत संयतात्मन् आचार्य श्री ओम शंकर जी का आज दिनांक 01/11/2021 का सदाचार संप्रेषण


आचार्य जी को बहुत कम आयु से एक सूत्र सिद्धान्त का वाक्य प्रभावित किये हुए है

जो करता है सब परमात्मा करता है

और वह अच्छा ही करता है

लेकिन यह प्रायः संकटों में याद आता है 

कष्ट संकट समस्याएं भोग हैं

धन की तीन अवस्थाएं भोग दान नाश हैं


आचार्य जी ने ठण्डी पुलिया कानपुर से संबन्धित एक प्रसंग सुनाया जब संघ के प्रचारक रहे ठाकुर साहब स्व राम गोविन्द सिंह जी (हिन्दू जागरण मंच ) ने आचार्य जी को प्रदेश का बौद्धिक प्रमुख बना दिया था


आचार्य जी ने एक और अत्यधिक रोचक कथा सुनाई जब देव इन्द्र ने ऋषि लोमस को अपने महल बुलाया


तैत्तिरीय उपनिषद् में परमात्मा के बारे में ज्ञान मिल जायेगा


आपने तुलसी के बारे में ये पंक्तियां लिखीं 


प्रचंड तेज शक्ति शील रूप के विधान हो

अनिन्द कर्म धर्म मर्म शर्म  संविधान हो

उदार हो विदार हो प्रफ़ुल्ल कोविदार हो

प्रसार भक्ति भाव राम नाम के प्रचार हो

(शर्म का अर्थ रक्षा,विदार का अर्थ युद्ध, कोविदार का अर्थ कचनार)

तुलसी हमारे मार्गदर्शक बने हुए हैं

आपने 

दातव्यमिति यद्दानं दीयतेऽनुपकारिणे।

देशे काले च पात्रे च तद्दानं सात्त्विकं स्मृतम्।।17.20।।गीता

का अर्थ बताया


ॐ तत्सदिति निर्देशो ब्रह्मणस्त्रिविधः स्मृतः।


ब्राह्मणास्तेन वेदाश्च यज्ञाश्च विहिताः पुरा।।17.23।

आदि में आये ॐ तत् सत्  का अर्थ बताया

संसार में हम कोई भी काम कर रहे हैं वह भगवान् करा रहा है यह भाव सदैव रहना चाहिए