24.9.26

प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज भाद्रपद शुक्ल पक्ष त्रयोदशी विक्रमी संवत् २०८३ तदनुसार 24 सितंबर 2026 का सदाचार संप्रेषण *१८८२ वां* सार -संक्षेप मुख्य विचारणीय विषय क्रम सं ३६४

 कहि दंडक बन पावनताई। गीध मइत्री पुनि तेहिं गाई॥

पुनि प्रभु पंचबटीं कृत बासा। भंजी सकल मुनिन्ह की त्रासा॥1॥


प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज भाद्रपद शुक्ल पक्ष त्रयोदशी विक्रमी संवत् २०८३  तदनुसार 24 सितंबर 2026 का सदाचार संप्रेषण

  *१८८२ वां* सार -संक्षेप 


मुख्य विचारणीय विषय क्रम सं ३६४

अपने गुणों को जानने का प्रयास करें और उनके आधार पर कर्मरत हो जाएं l


जिस शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा उत्तीर्ण करना और किसी प्रकार जीविका प्राप्त कर लेना रह जाए, वह मनुष्य को जीवन की व्यापकता और उसकी सार्थकता का बोध नहीं करा सकती। ऐसी शिक्षा से हाथ को काम तो मिल सकता है, किन्तु जीवन को दिशा नहीं मिलती। वर्तमान समय की शिक्षा ऐसी ही है l हमें आवश्यकता है ऐसी शिक्षा की जो मनुष्य को जीविका अर्जित करने का सामर्थ्य तो दे ही, साथ ही उसके भीतर संस्कार, स्वावलम्बन, शौर्य, सेवा, त्याग,लोकमंगल आदि गुण विकसित करे l आचार्य जी हमें परामर्श दे रहे हैं कि हम व्यावहारिक अध्ययन के साथ अपने सद्ग्रंथों का अध्ययन करें, स्वाध्याय करें l यदि हम सद्ग्रन्थों के अध्ययन और स्वाध्याय में रम जाएं , उनके विचारों को केवल पढ़ें नहीं, बल्कि अपने जीवन में उतारने का प्रयत्न करें, तो हमारी प्रकृति और व्यक्तित्व में भी ऐसे गुण विकसित हो सकते हैं, जैसे पं. दीनदयाल उपाध्याय जी के जीवन में दिखाई देते हैं। उन्होंने अपने विचार, आचरण और कर्म के माध्यम से समाज और राष्ट्र के जीवन में उल्लेखनीय यश एवं प्रभाव अर्जित किया।


जलते जीवन के प्रकाश में अपना जीवन तिमिर हटायें,

उस दधीचि की तपः ज्योति से एक-एक कर दीप जलाएं।

भारतभूमि की प्रकृति ही ऐसी रही है कि यहाँ संयम, निःस्वार्थता, त्याग, सेवा और राष्ट्रनिष्ठा को जीवन के उच्च आदर्श माना गया। इसी जीवन-दृष्टि की पृष्ठभूमि में पं. दीनदयाल उपाध्याय, जिनकी जयंती को कल संपूर्ण विश्व मनाने जा रहा है,जैसे अनेक महापुरुष इस भूमि पर जन्मे और उन्होंने अपने जीवन को व्यक्तिगत यश अथवा स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के कल्याण के लिए समर्पित किया। हमारे पास जो  भी तत्त्व,शक्ति, सामर्थ्य, भक्ति, संयम, राष्ट्र -सेवा है उसके हम दर्शन करें, मनुष्यत्व की अनुभूति करें l

इसके अतिरिक्त आचार्य जी ने मानस में आज क्या बताया, क्या मां कैकेयी रावण -वध में सहायक बनीं,भैया अखिलेश तिवारी जी का उल्लेख क्यों हुआ, चित्रकूट के किस स्थान का उल्लेख हुआ जानने के लिए सुनें l