26.9.26

प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज भाद्रपद शुक्ल पक्ष पूर्णिमा विक्रमी संवत् २०८३ तदनुसार 26 सितंबर 2026 का सदाचार संप्रेषण *१८८४ वां* सार -संक्षेप

 तुम्ह निज मोह कही खग साईं। सो नहिं कछु आचरज गोसाईं॥

नारद भव बिरंचि सनकादी। जे मुनिनायक आतमबादी॥3॥


प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज भाद्रपद शुक्ल पक्ष पूर्णिमा विक्रमी संवत् २०८३  तदनुसार 26 सितंबर 2026 का सदाचार संप्रेषण

  *१८८४ वां* सार -संक्षेप




हमारा लक्ष्य है कि हम सुयोग्य, सक्षम व्यक्ति संगठित रहें ताकि हमारा सनातन धर्मी समाज भयभीत भ्रमित न रहे l संगठन अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है l संगठन में अपार शक्ति होती है l एक कुशल संगठनकर्ता  प्रेम आत्मीयता के आधार पर सबको संयुत रखने का प्रयास करता है l सुयोग्य व्यक्ति के भीतर से एकांतभाव समाप्त होना आवश्यक है ताकि वह उत्साहित रह सके l हमारे भीतर अनन्त शक्तियां विद्यमान हैं l इन वेलाओं का उद्देश्य यही है कि हम अपनी अन्तर्शक्तियों को पहचानें  - कोऽहं सोऽहम्,अपने दंभ का निरसन करें l आचार्य जी कहते हैं कि हम अध्ययन स्वाध्याय अवश्य करें हमारे ग्रंथों में अद्भुत ज्ञान समाहित है हमें उनका लाभ उठाना चाहिए l ये हमारी निराशा हताशा समाप्त करने में सक्षम हैं l 


आचार्य जी ने शक्ति -केन्द्रों को कैसे स्पष्ट किया, भैया शुभेन्दु जी का उल्लेख क्यों हुआ, उत्तर कांड में आचार्य जी ने क्या बताया, पंचपल्लव कौन कौन से हैं जानने के लिए सुनें l